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हमारी सबसे अनमोल सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने शुक्रवार, 15 मई, 2026 को मानवता के लिए एक प्रेमपूर्ण संदेश रिकॉर्ड करने के लिए समय निकाला, जिसमें उन्होंने मारा के राजा के साथ ग्रह शांति की संभावनाओं और भौतिक दुनिया के नियमों के बारे में अपनी हालिया बातचीत का जिक्र किया, जिन्हें वह मानव जाति के साथ साँझा करना चाहते हैं। मास्टर ने अपने ईश्वर के कुछ शिष्यों और अन्य विद्यालयों के शिष्यों के आध्यात्मिक स्तर में आए परिवर्तन का भी खुलासा किया। याद है, मैंने आपको बताया था कि हमारे समूह में लगभग 60% अच्छे दीक्षित हैं और 40% अच्छे नहीं हैं। और कुछ अभी भी सूक्ष्म स्तर या नरक स्तर पर हैं, या कुछ तो जुनूनी भूतों के स्तर के भी हैं। वास्तव में, वे सच्चे साधक नहीं हैं, उन्हें नर्क से मुक्त करके स्वामी के लिए पीड़ा पैदा करने, भ्रम फैलाने और मेरे शिष्यों को भटकाने की कोशिश करने के लिए भेजा जाता है! लेकिन कर्मों से भरी यह दुनिया इसे प्रकट होने देती है! उनके घृणित कर्म, लूटने वाली हरकतें देखिए, तब आप जानेंगे कि वे भीतर और बाहर से क्या हैं! आप उनमें से कुछ को हाल के वर्षों में उजागर होते देख चुके हैं, जो प्रसिद्धि और लाभ पाने के लिए मेरे नाम, मेरी शिक्षा का उपयोग कर रहे थे! लेकिन वह संख्या बदल गई है। […] मैंने मारा के राजा से बात की और उन्होंने कहा, “हाँ। शांति सचमुच आ रही है।” मैंने कहा, “हाँ, लेकिन मुझे वह उतनी दिखाई नहीं देती, जितनी मैं चाहती हूँ। फिर भी, मुझे बताइए, हम कैसे जीत सकते हैं? तो हमें शांति कैसे मिल सकती है?” तो उन्होंने कहा, “प्रेम के कारण। प्रेम ने युद्धों पर विजय पाई, और शांति को स्थापित होने का अवसर मिला। […]” मैंने उनसे पूछा, “यह प्रेम कहाँ से आता है? कैसा प्रेम युद्ध को अभिभूत कर उस पर विजय पा सकता है?” […] मैं आपसे कहती हूँ, आप अभी जो भी हैं मिस्टर पुतिन की भूमिका में, यदि आप रुक जाएँ, यदि आप पश्चाताप करें और शांति स्थापित करें अब से बारह दिनों के भीतर, तो मैं आपको, आपकी आत्मा को बचाने का वादा करती हूँ। और मैं यह ईश्वर को साक्षी मानकर, प्रभु यीशु के नाम पर, सभी संतों और मुनियों को साक्षी मानकर, और विश्व के सभी लोगों को इसका साक्षी बनाकर कहती हूँ। इसलिए यह एक सच्चा वादा है। यह केवल मिस्टर पुतिन के लिए नहीं है, बल्कि आपमें से जो भी हाल में बिना किसी उचित कारण के युद्ध करता है, मैं ईश्वर की कृपा से अपनी शक्ति का उपयोग करके आपको क्षमा कर दूँगी और आपकी आत्माओं को बचा लूँगी उस प्रतीक्षित सबसे भयावह नरक से, जिसकी कल्पना कोई कभी नहीं कर सकता। मैं जानती हूँ कि यह सत्य बताकर मैं अपनी सुरक्षा को जोखिम में डाल रही हूँ। लेकिन सभी युद्ध-पीड़ितों की खातिर, मैंने यह कहा। बहुत-से युद्धोन्मादी पहले ही जा चुके हैं- कुछ नरक में, कुछ राजनीतिक क्षेत्र से बाहर। कृपया बहुत देर होने से पहले शांति की दिशा में जाकर स्वयं की रक्षा करने पर विचार करें! भले ही आप युद्ध के अग्रणी नेता की भूमिका में न हों, लेकिन यदि आप नेताओं को युद्ध करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, देशों को युद्ध के लिए उकसाने या युद्ध भड़काने के लिए कहानियाँ गढ़ते हैं, युद्ध को बढ़ावा देने वाली स्थितियाँ बनाने के लिए बिक्री के लिए हथियारों का ढिंढोरा पीटते हैं, बिना किसी उचित कारण के अपने ही नागरिकों पर क्रूरतापूर्वक अत्याचार करते, उन्हें मारते/कारावासित करते हैं जिससे भीतर या बाहर से युद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो आप युद्ध-निर्माताओं की ही श्रेणी में हैं और आपको नरक-यातनाओं का दंड भुगतना होगा!!! अपने ही या दूसरे राष्ट्रों के नागरिकों पर तानाशाही से अत्याचार करना, उन्हें डराना-धमकाना, यातना देना भी युद्ध करना, युद्ध भड़काना, युद्ध का कारण पैदा करना माना जाता है, क्योंकि अन्य राष्ट्र उनकी पीड़ा को अनदेखा नहीं कर सकते और मदद के लिए भीख माँगने पर मजबूर हो जाते हैं, जिससे संघर्ष संभव होता है, और निश्चित रूप से, इसका परिणाम भी नरक ही होता है। आप कभी भी यह कल्पना नहीं कर सकते कि वह पीड़ा कैसी हो सकती है। कोई भी नहीं कर सकता। इसीलिए मनुष्य परिणामों को जाने बिना पाप करना जारी रखते हैं!! तो आप सभी नेता, कोई और युद्ध छेड़कर लोगों, निर्दोष लोगों, महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को हानि पहुँचाने से पहले दो बार सोचें। और सबसे बड़ी हानि आप स्वयं को पहुँचाते हैं। इसे रोकें। अभी पश्चाताप करें। अभी शांति स्थापित करें। […] मारा के राजा के पास आपसे साँझा करने के लिए दस नियम हैं, ताकि आप अपने लिए बेहतर जीवन चुनना जानें और फिर आपको कष्ट न सहना पड़े, जैसे इस संसार में, इस कष्टमयी जीवन में फिर जन्म लेना या फिर हमेशा के लिए अधिक कष्ट भोगने के लिए अधोलोक जाना। पहला नियम… […] कृपया आगे देखते रहिए ताकि आपको पता चल सके कि किस प्रकार का प्रेम युद्ध पर विजय प्राप्त कर सकता है, हमारे ग्रह पर वर्तमान में कितने संत ऐसे हैं जिन्होंने तीनों लोकों के स्तर को पार कर लिया है, मास्टर भगवान के शिष्यों के बारे में मारा के राजा की क्या राय है, आदि... कृपया इस संदेश के प्रसारण को अधिक उपशीर्षकों के साथ देखने के लिए रविवार, 31मई, 2026 को 'मास्टर और शिष्यों के बीच' पर देखें।











