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और अब हमारे पास नेपाल की राधिका से नेपाली भाषा में एक हार्टलाइन है, बहुभाषी उपशीर्षकों के साथ:गुरुवर की जय हो! गुरुवर की सदा जय हो! सतगुरु की सदा जय हो! हम संयुक्त तीन परम शक्तिशाली सत्ता से और सभी 33 श्रेणियों के देवी-देवताओं और दिव्य सत्तवों से हार्दिक प्रार्थना करते हैं कि विश्व वीगन, विश्व शांति के लिए आपका अभियान यथाशीघ्र सफल हो और आपके भौतिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शरीर सदा सुरक्षित और आशीषित रहें।हे गुरुवर! आपने असीम करुणा और दया से प्रेरित होकर सभी सत्त्वों के उद्धार और मुक्ति के लिए समस्त सांसारिक सुख-सुविधाएँ त्याग दिए और आप इस भवसागर में अवतरित हुए। हम असहाय प्राणियों के पास ऐसा क्या हो सकता है, जिससे हम आपके द्वारा बरसाई गई अथाह कृपा और महान उपकार का ऋण चुका सकें? फिर भी आपकी असीम कृपा से मेरे हृदय में आपके प्रति गहन प्रेम और भक्ति से भरे ये भाव खिल उठे हैं। इन हार्दिक भावनाओं को इस छोटी-सी विनम्र कविता में पिरोकर, “सुप्रीम मास्टर चिंग हाई दिवस” के इस पावन अवसर पर इसे श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता के विनम्र पुष्प के रूप में आपके श्रीचरण-कमल में अर्पित करने का अवसर पाकर मैं स्वयं को अत्यंत धन्य और सौभाग्यशाली मानती हूँ। कविता इस प्रकार है:तन पुलकित, मन आनंद में झूमे अपार; भटक रहे इस चंचल हृदय को आपमें मिला आधार...! रोम-रोम अब पुलकित होकर काँप रहा है; जाने क्यों यह हृदय सदा के लिए आपसे प्रेम कर बैठा है!जन्म-जन्म के कर्मों का मैल भक्ति के जल से पूरी तरह मैं धोती हूँ, और मार्ग दिखाने वाले गुरु को मैं इस हृदय में पूजती हूँ...!आत्म के शांति की खोज में कितने लोग मंदिरों और तीर्थस्थलों के द्वार पर भटकते रहते हैं; लेकिन चारों धाम सच्चे गुरु के चरणों में ही होते हैं और कहीं नहीं...!निस्वार्थ प्रेम से, बिना कुछ माँगे, मैं आपके चरण-कमलों में श्रद्धा के ये पुष्प चढ़ाती हूँ; भीतरी नेत्र खोलने वाले सच्चे गुरु को पूर्ण समर्पण से बारंबार साष्टांग प्रणाम करती हूँ...!धन्यवाद! नेपाल से राधिकासाथ में, गुरुवर! आज सुबह, 26 अगस्त 2026 को, जब मैं यह हार्टलाइन लिख रही थी, तभी हमारे देश नेपाल में एक बड़ी प्राकृतिक आपदा आई। पर्यावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ने से पर्वत के शिखर पर स्थित एक हिमनद फट गया और इससे आई बाढ़ नीचे की घाटियों एवं गहरी खाइयों में बसी अनेक बस्तियों को बहा ले गई, जिससे जान-माल की भारी क्षति हुई। हज़ारों लोग लापता हैं और हज़ारों अन्य बेघर हो गए हैं। बाढ़ के पानी में सभी जगह मनुष्यों और पशु-जनों के शव बहते दिखाई दे रहे हैं। आज मुझे याद आ रहा है कि 15–20 वर्ष पहले हमने देश के विभिन्न भागों में वैश्विक तापमान वृद्धि और वैकल्पिक जीवनशैली पर लगभग 50–60 हज़ार पर्चे बाँटे थे। उस समय दी गई हमारी चेतावनी को आज अपनी आँखों के सामने सच होते देखकर मेरा हृदय गहरे दुःख से भर गया है। पर ऐसी स्थिति में हम प्रार्थना करने के अलावा और क्या कर सकते हैं?शालीन राधिका, एक आत्मज्ञानी गुरु के प्रेम की कोई सीमा नहीं होती, और ऐसे सच्चे गुरु को पाने की कृपा मिलना वास्तव में जीवन के सबसे अनमोल आशीर्वादों में से एक है।गुरुवर का स्नेहपूर्ण जवाब आपकी प्रतीक्षा कर रहा है: “प्रेरित राधिका, आपकी कविता अत्यंत हृदयस्पर्शी है। आपके शब्दों में अपार प्रेम समाहित है। हर पद सुंदर भाव बिखेरता है। आपके पास जो कुछ है, उसके प्रति इतना विचारशील और कृतज्ञ होने के लिए धन्यवाद। यह देखना बहुत दुखद एवं असहाय महसूस कराने वाली बात है कि मानवता धीरे-धीरे उसी घर को नष्ट कर रही है, जो हम सभी का साझा घर है। फिर भी, संकट की घड़ी में उदार लोगों और राष्ट्रों को आपके देश में भरपूर सहायता पहुँचाते हुए भी देखने को मिल रहा है। इससे कुछ हृदयस्पर्शी सांत्वना मिलती है और इसने मेरी आँखों में आँसू ला दिए हैं। नेपाल की यह त्रासदी गंभीरता से याद दिलाती है कि हमारे प्राकृतिक जगत का संतुलन कितना नाज़ुक हो सकता है। हम केवल यही आशा कर सकते हैं कि ये विनाशकारी घटनाएँ मनुष्यों में धरती माता के प्रति जिम्मेदारी का बोध, करुणा और सम्मान जगाएँ, इससे पहले कि परिणाम अपरिवर्तनीय हो जाएँ। आप जहाँ भी हों, जो भी करें, संयुक्त परम शक्तिशाली तीन सत्ता को स्मरण करते रहें। इन कठिन परिस्थितियों में आप और मददगार नेपाली लोग शक्ति, सांत्वना, और कृपा से घिरे रहें। परमेश्वर आपसे सदा प्रेम करते हैं। और परमेश्वर की कृपा से, मैं सदा आपके साथ हूँ, यथासंभव सभी प्रकार से आपकी सहायता और मदद करने के लिए।"











