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प्रतिलिपि
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सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के साथ मीडिया साक्षात्कार, 12 भागों का भाग 8

विवरण
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इस एपिसोड में, मास्टर समझाती हैं कि हम गृहस्थ जीवन जीते हुए भी ईश्वर को जान सकते हैं, आत्मज्ञान क्या है और ध्यान की क्वान यिन विधि ईश्वर की आंतरिक शिक्षा का चिंतन है।

Bonnie: मास्टर, मुझे याद है कि पिछली बार जब आप इस कार्यक्रम ‘सीइंग बियॉन्ड’ में आई थीं, तब आपने एक बहुत मार्मिक कहानी सुनाई थी और यह कि आप विवाहित थीं और अचानक – ठीक है, शायद वो सब अचानक नहीं था - पर जैसे-जैसे आप आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ती गईं, आपका जीवन बदलने लगा। मैं जानती हूँ कि शायद हमारे बहुत-से श्रोताओं को भी अपना जीवन कुछ ऐसा ही लगता भी होगा। क्या आप अपने जीवन के उस दौर के बारे में हमसे फिर साझा करेंगी?

Master: हाँ। फिर भी, मैं किसी और को ऐसा करने की सलाह नहीं दूँगी, क्योंकि वैवाहिक जीवन एक पवित्र जीवन होता है। सबसे पहले हमें उसे बनाए रखना चाहिए। तब मुझे आत्मज्ञान नहीं हुआ था, इसलिए कृपया मुझे क्षमा करें। और शायद, मेरे जीवन को ऐसा ही होना था, पर हम प्रत्येक के जीवन को नहीं।

और वो ऐसा भी था कि परिवार, प्रेम जीवन और हृदय के भीतर से आती किसी दूसरी पुकार के बीच एक बहुत बड़ा संघर्ष भी था। (सही।) हाँ। पर अंततः, आत्मज्ञान के लिए घर छोड़ना या पारिवारिक सुख त्यागना आवश्यक नहीं है। दोनों हम साथ-साथ भी कर सकते हैं। हमारे बहुत-से दीक्षित साथीयों सामान्य जीवन जीते हैं हुए सुखी है और साथ ही परमात्मा को भी जान पा रहे हैं। इसलिए हम सबके लिए यही बेहतर होगा। यदि मुझे यह पहले पता होता, तो मैं अपने पति को नहीं छोड़ती। वे एक अद्भुत व्यक्ति थें। हाँ।

(तो, आपकी बात से, मैं यही समझती हूँ कि हम चाहे जो कर रहे हों या जहाँ भी हों, हम आत्मज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।) एकदम बिल्कुल। हाँ।

Bonnie: सुप्रीम मास्टर चिंग हाई, आप जानते हैं ‘आत्मज्ञान’ शब्द का प्रयोग अक्सर होता है। (हाँ।) इसका वास्तव में अर्थ क्या है?

Master: हाँ। इसे कुछ ही शब्दों में ठीक से बताना कठिन है, पर यह है, जानने की एक प्रक्रिया कि जीवन से परे क्या है, और उन वस्तुओं से परे क्या है जिन्हें हम अपनी आँखों से देख या भौतिक उपकरणों से छू सकते हैं। यह वह क्षण है जब हम उससे भी कुछ बड़ी वस्तु को जानना शुरू करते हैं, पूरे ब्रह्मांड के सच्चे नियंता को, जो हमारे भीतर भी है।

(गुरुवर, मुझे ऐसा लगता है कि हम… मुझे याद है, बचपन में मुझे भी कुछ ऐसी ही संवेदना होती थी, जिसे और कुछ समय के लिए भूल गई थी।) सही। सामान्यतः हमारे बड़े होने की अपेक्षा हमारा जन्म होता है, तब हम अधिक आत्मज्ञानी होते हैं, (सही।) क्योंकि उस समय हम ईश्वर विधान के अधिक निकट होते हैं। और जब बड़े हो जाते हैं, फिर हम हर दिन अर्जित जानकारी और दूसरों से मिली धारणाओं से, पहले धीरे-धीरे, फिर पूरी तरह अपनी पहचान जोड ़लेते हैं; जैसे लोग हम को हस्तांतरित करते हैं, हम को बताते हैं, “तुम यह हो, तुम वह हो। तुम फलां फलां श्रीमती हो,” और फिर धीरे-धीरे हम उससे अपनी पहचान बनाने लगते हैं। जो जानकारी हम पाते हैं, और वह आदतों जो अपनी पृष्ठभूमि या समाज में दूसरे लोगों की संगति की वजह से हम जमा करते हैं, उससे हमारी पहचान उतनी ही गहरी होती है; जितनी ज़्यादा हमारी उम्र होती है।

(इसीलिए हमारे महान लेखकों में से एक, अंग्रेज़ लेखक शेक्सपियर ने कहा था, “दुनिया में सबकुछ एक रंगमंच है।” और आपकी बात से लगता है, गुरुवर, कि हम अभिनेता-अभिनेत्री की भूमिकाओं में उलझकर भूल जाते हैं कि वास्तव में हम कौन हैं।) हाँ, बॉनी, आपने ठीक समझा।

Jared: सुप्रीम मास्टर चिंग हाई, मैं कुछ देर के लिए आपकी जन्मभूमि, वियतनाम की ओर लौटना चाहती हूँ। (हाँ।) और अभी, हाल ही में, बॉनी और मैंने, हज़ारों अन्य लोगों के साथ, बौद्ध गुरु मास्टर थिक न्यात हान्ह के सान्निध्य में कुछ समय बिताया था। मैं जानना चाहती हूँ कि वियतनाम में बिताए समय ने आपके जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया?

Master: शायद, अवचेतन रूप से उसने मुझे प्रभावित किया, क्योंकि मैं युवान थी तब से ही, मैंने मृत्यु देखा, मैंने घृणा देखी, मैंने युद्ध का विनाश देखा और कुछ स्थानों पर लोगों का दुःख देखा था जब मैं युवान थी। (हाँ। जब फ़्रांसीसी और अमेरिकी युद्ध चल रहे थे, तब आप वहाँ थीं?) केवल अमेरिकी युद्ध के दौरान। मेरे पिता फ़्रांसीसी शासन के समय थे।

Jared: समझी, (हाँ।) समझी। तो युद्ध के दौरान जो कुछ हो रहा था, वह आपने देखा था? (हाँ, बहुत करीब से।) आपके देश के विरुद्ध उस युद्ध को लेकर क्या आज भी अमेरिकियों के विरुद्ध आपके मन में कोई भावना है?

Master: मैंने कभी नहीं सोचा कि अमेरिकियों ने मेरे देश के विरुद्ध युद्ध किया था। वास्तव में, उन्होंने जो किया उसके लिए मैं उनकी आभारी हूँ, क्योंकि लोग सोच सकते हैं कि वियतनाम युद्ध में जाकर उन्होंने गलती की, पर कभी-कभी लोगों से गलतियाँ हो जाती हैं। नीयत जो होती वह महत्त्वपूर्ण है; परिणाम नहीं। और मुझे विश्वास है कि उस समय औलाक (वियतनाम) गए सभी युवा अमेरिकियों के मन में सत्य और स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले नायक का अत्यंत उच्च और महान आदर्श था। और दुर्भाग्यवश हम असफल हुए, यह परमात्मा की योजना हो सकती हो, मेरे लोगों का कर्म था, या संभवतः ये सभी था। लेकिन मैंने इसके लिए अमेरिकियों को कभी उत्तरदायी नहीं माना। और औलाक (वियतनाम) में जिन अमेरिकी सैनिकों से मैं मिली, उनमें से कुछ चिकित्सकों थें… युवावस्था में मैं उन चिकित्सकों के लिए कभी-कभी दुभाषिए का काम भी करती थी। वे बहुत विनम्र और दयालु थे। बिल्कुल आपकी तरह, और उन अधिकांश अमेरिकियों की तरह जिनसे मैं यहाँ मिली हूँ; इसमें कोई संदेह नहीं। और उनके बारे में वही सोचती हूँ… यही है अमेरिकियों की मेरी स्मृति। (ज़रूर।)

Bonnie: गुरुवर। (जी।) क्या इस ग्रह पर युद्ध हमेशा होते रहेंगे, या हम किसी ऐसी अवस्था की ओर बढ़ रहे हैं... मैं जानती हूँ कि आप पीस एवार्ड, वर्ल्ड पीस एवार्ड के प्राप्तकर्ता है। क्या हम इस ग्रह पर ऐसी अवस्था की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ युद्ध समाप्त हो जाएँगे और वे भौतिक वास्तविकता नहीं रहेंगी?

Master: आइए, प्रार्थना करें कि ऐसा ही हो। लेकिन, जैसा कि आप जानते हैं, हम जैसा बोते हैं, वैसा ही काटते हैं। और इसलिए, यदि हमारे पिछले कर्मों के सभी बीज अब तक धुल चुके हों, तो फिर हमारे और कोई युद्ध नहीं होंगे। और यदि हम युद्ध के नए बीज न बोएँ, फिर, ज़रूर, हमारे वहाँ शांति होगी। पर मुझे लगता है कि इसमें कुछ और समय लगेगा, और यह इस ग्रह के सभी लोगों कीतने इच्छुक हैं उस पर निर्भर करता है।

(गुरुवर, मैं जानता हूँ कि आपने अनेक बड़ी समस्याओं का सामना किया है। मेरा मतलब है कि ‘समस्या’ कहना भी न्यूनोक्ति होगी। मेरा आशय, बाढ़, आग आदि प्राकृतिक आपदाओं हैं, जैसे हाल में दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया में लगी आग। साथ ही, बोस्निया और हर्ज़ेगोविना तथा पूर्व यूगोस्लाव गणराज्य में जारी संघर्ष जैसी घटनाएँ देखना भी जारी रहा हैं क्या आपको ऐसा कुछ लगता है कि आपको वहाँ जाकर किसी तरह उस युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति लाने के लिए बुलाया जा सकता है?)

इस समय, मुझे ऐसी कोई भी अनुभूति नहीं है, लेकिन जोभी हम कर रहें है, अरे जहाँ भी रहते हैं, उसका प्रभाव पूरे विश्व पर वैसे ही पड़ता है। तो, हम वहाँ सद्भावना भेज सकते हैं; और अपने पुण्य, और हम जो भी नेकनियती से करे उसका प्रभाव पूरे विश्व की जनसंख्या पर पड़ेगा, चाहे हम वहाँ उपस्थित हों या नहीं। लेकिन यदि हम एक तरह से परमात्मा के साधन हैं, तो किसी स्थान पर लोगों के लिए हमारी मौजुदगी, निस्संदेह, अधिक उत्थानकारी वातावरण ला सकती है। और जब भी परमात्मा की इच्छा होगी कि मैं वहाँ जाऊँ, तो बिल्कुल मैं वहाँ धकेल दि जाउंगी, चाहे मैं चाहूँ या नहीं।

(सही। आप यहाँ बार-बार ईश्वरी विधान शब्द का प्रयोग करती रहती हैं, यानी एक प्रकार की दिव्य योजना की, और मुझे ऐसा लगता है कि आप उस दिव्य योजना का अनुसरण करने वाली व्यक्ति हो, कहीं भी जाती हो, जहाँ वह आपको ले जाती हैं।) सचमुच। हाँ। (सच में। गुरुवर, क्या आप अपने संगठन की गतिविधियों और लोगों की प्रत्यक्ष, भौतिक रूप से इतनी सहायता करने के लिए किए गए कार्यों के बारे में कुछ बताएँगी?)

हाँ। अच्छा, वास्तव में, हमने इसकी शुरुआत इस उद्देश्य से नहीं की थी, और न ही कोई संगठन बनाने के लिए की थी। यह बस ऐसा कि जब मैं विश्व भर में कुछ प्रसिद्ध हो गई, तब प्रशासनिक आवश्यकताओं के कारण लोगों ने एक संगठन बनाया, ताकि सब कुछ स्पष्ट रहे और सरकार व हमारे आसपास के लोग जानें कि हम हर सप्ताह इतनी बड़ी संख्या में क्यों एकत्र होते हैं, या ध्यान करने के लिए एकत्र होते हैं। इसलिए हमारा एक तथाकथित संगठन है, लेकिन उसमें कोई पदानुक्रम नहीं है, (सही।) जैसा कि कौन अधिक ऊँचा है और कौन अधिक नीचा है, इत्यादि। हमारे यहाँ ऐसा नहीं है। जब तक हम इस संसार में हैं, कार्य में सहाय करने के लिए, यह बस स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था है।

और आप जिन्हें हमारे अच्छे कार्य कहते हैं—आपदा राहत तथा अन्य सभी कार्यों—वे सहज रूप से हो जाते हैं, एक तरह, वैसे ही, क्योंकि किसी को हम आपदा में देखते हैं, हम सोच सकते हैं कि वो हम भी हो सकते थे। यह बहुत आसान है, और फिर लोगों की भावनाओं को हम महसूस करते हैं। अतः हमारे पास जो भी धन या जन-शक्ति होते हैं, हम उन्हें दे देते हैं; हम योजनाबद्ध कार्रवाई या संगठन बनाने आदि के बारे में नहीं सोचते। हम सोच-विचार नहीं करते। मुझे नहीं पता कि इसे आपको कैसे समझाऊँ। हम बस धन, जनशक्ति या जिस भी सहायता की वे सहानुभूतिपूर्ण माँग हम से करते हैं, वह हम करते हैं।

Bonnie: मुझे लगता है कि आप, आपका संगठन और आपके अनुयायीओं आवश्यकता को महसूस करते हैं, और वहीं जाते हैं और जो करना आवश्यक हो, वही करते हैं। (सही, बिल्कुल यही।) यह जीवन जीने का बहुत स्त्रैण ढंग है, है न?

Master: हाँ। बहुत सरल। (बहुत सरल।) हमारा जीवन बहुत सरल है। हाँ।

(उस स्त्रैण दृष्टिकोण की बात चली है, तो शायद यह चर्चा करने का उचित समय है कि आप अपने कार्य और शिक्षाओं में क्वान यिन पद्धति के प्रयोग को किस प्रकार समझाती हैं।)

(और इससे पहले कि हम ये करें, हमें एक विराम लेने की जरूरत है। (ठीक है।) पर हम वापस आएँगे। जैरेड, आपने उत्सुकता अच्छी तरह जगा दी। हम लौटेंगे और चर्चा करेंगे क्वान यिन ऊर्जा के बारे में। निश्चित रूप से, हम इस संसार में अधिक स्त्रैण उपचारकारी ऊर्जा का आगमन अनुभव कर रहे हैं। इसके लिए परमात्मा का धन्यवाद। और आज हम बातचीत कर रहे हैं सुप्रीम मास्टर चिंग हाई से। वे लॉस एंजिलिस क्षेत्र से हमसे फ़ोन पर जुड़ी हैं। इस शुक्रवार की सुबह आप हमारे साथ है इस लिए हम प्रसन्न हैं, और हम शीघ्र लौटेंगे।)

Jared: अच्छा, आपका पुनः स्वागत है। यह रेडियो 2000 का कार्यक्रम ‘सीइंग बियॉन्ड’ है, और आपके मेज़बान हैं बॉनी और जैरेड। हमें प्रसन्नता है कि आज दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया से फ़ोन पर हमारे साथ हैं सुप्रीम मास्टर चिंग हाई।

Bonnie: नमस्कार, गुरुवर, हम फिर आपके साथ हैं। (नमस्कार।) नमस्कार। क्या आप मुझे स्पष्टता से सुन पा रहे हैं? क्योंकि कभी-कभी फ़ोन की आवाज़ थोड़ी धीमी हो जाती है। अब आवाज़ बेहतर है। (आवाज़ बेहतर है।) आवाज़ बेहतर है। आप जानते हैं, गुरुवर, जब आप वहाँ अपनी मातृभाषा में बात कर रही थीं, तब मुझे ध्यान आया कि आप कितनी व्यस्त रहती हैं; और हम इस के बारे में भी बात करेंगे। मुझे पता है कि हम यहाँ सोफी के साथ स्टूडियो में चर्चा कर रहे थे कि आप जो कार्य करतीं हैं, उस में इतनी व्यस्त रहती हैं कि सोने भी नहीं जातीं, या फिर रात के तीन बजे तक ही सो पाती हैं। (अक्सर ऐसा होता है।) अक्सर। इसलिए मैं यह बात स्वीकार करते हुए इस कार्यक्रम में हमारे साथ आने के लिए सुबह जल्दी उठने पर आपका बहुत धन्यवाद करता हूँ। और अब, हम संसार में आ रही बढ़ती हुई इस स्त्रैण ऊर्जा के बारे में चर्चा करने वाले हैं।

(आइए, पहले इस अवधारणा पर बात करें… पश्चिम में बहुत-से लोगों को शायद तनिक भी पता नहीं कि क्वान यिन कौन हैं या क्या हैं।) हाँ। देखें, संभवतः लोगों ने करुणा की देवी के नाम के रूप में क्वान यिन का नाम सुना होगा, लेकिन इसका हमारी तथाकथित पद्धति से कोई संबंध नहीं है। क्योंकि हम जो बताते हैं, क्वान यिन केवल आंतरिक (स्वर्गीय) नाद, परमात्मा की उस आंतरिक शिक्षा पर ध्यान लगाना है, जो हमारे जीवन के हर क्षण स्पंदित होती है। जब हम इस जीवन-स्पंदन या परमात्मा की शिक्षा से जुड़ जाते हैं, तभी हम तथाकथित क्वान यिन पद्धति में प्रवेश करते हैं; पर भौतिक दृष्टि से कहें, तो वैसे कोई पद्धति है ही नहीं। लेकिन हमें इसे कोई नाम देना पड़ता है; अन्यथा लोग पूछते हैं, “आप हमारे लिए क्या लाई हैं? आप हमें क्या सिखाती हैं?” कुछ भी ठोस नहीं।

इसलिए क्वान यिन पद्धति का अर्थ परमात्मा की आंतरिक शिक्षा, अपने ईश्वर स्वरूप पर ध्यान लगाना है, बाइबल जो कहती है, “आरंभ में शब्द था, और शब्द ईश्वर के साथ था और शब्द ही ईश्वर था।” यह एक प्रकार की मधुर संगीतमय शिक्षा है, और हम इसे जितना अधिक सुनते हैं, उतने ही ज्यादा बुद्धिमान, शांत और प्रसन्न होते जाते हैं।

(इस साधना-पथ पर चल रहे विद्यार्थियों से बात करती हैं, तो आप उन्हें यह पहचानने में कैसे सहायता करती हैं कि वे भीतर जो सुन रहे हैं, वह ईश्वर का शब्द है, बताएंगी आप?) ओह, समझी। यह बहुत सरल है। क्योंकि आप इसे जितना अधिक सुनते हैं, उतने ही अधिक बुद्धिमान और अधिक प्रेमपूर्ण होते जाते हैं। और फिर भी आप इसे जान जाएंगे, क्योंकि आत्मा ही आत्मा को जान जाएगी। आप उसे पहचानते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं रहता। वैसे तनिक भी संदेह नहीं रहेगा। कुछ लोगों को अपने वास्तविक स्वरूप और सच्चे ईश्वर के बारे में आश्वस्त होने में समय लग सकता है; यह हमारी चेतना के स्तर और इस पर निर्भर करता है कि तथाकथित दीक्षा के समय हम अपने सच्चे स्वरूप को किस स्तर तक पहचानते हैं। इसी के अनुसार हम शीघ्र या देर से पहचानेंगे कि यही सच्चे ईश्वर और ईश्वर की सच्ची शिक्षा है।

Photo Caption: “जब भगवान असली अमृत दें तो तैयार रहें”

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